श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026: संतान-सुख और श्रीहरि की कृपा का पावन पर्व

Ajay sharma
0

 


श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा और एकादशी व्रत करने से संतान-सुख, पारिवारिक सुख-शांति और श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है।


पुत्रदा एकादशी की पौराणिक कथा


प्राचीन समय में माहिष्मती नगरी में राजा सुकैतुमान राज्य करते थे। उनकी पत्नी शैव्या धर्मपरायण थीं, लेकिन उनके जीवन में संतान का अभाव था। राजा इस चिंता से अत्यंत व्याकुल रहते थे।


एक दिन वन में उन्हें ऋषियों का दर्शन हुआ। ऋषियों ने उन्हें श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत करने तथा भगवान विष्णु की विधिपूर्वक आराधना करने की सलाह दी। राजा ने श्रद्धापूर्वक एकादशी का व्रत किया और भगवान श्रीहरि से संतान प्राप्ति की प्रार्थना की।


भगवान विष्णु की कृपा से उनकी मनोकामना पूर्ण हुई और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। इसी कारण यह एकादशी पुत्रदा एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हुई। मान्यता है कि संतान-सुख की इच्छा रखने वाले दंपती इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।


2026 में श्रावण पुत्रदा एकादशी


पोस्टर में दिए गए मुंबई पंचांग के अनुसार, रविवार, 23 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल एकादशी का व्रत बताया गया है। एकादशी तिथि का प्रारंभ 23 अगस्त को प्रातः 2:00 बजे तथा समापन 24 अगस्त को प्रातः 4:18 बजे बताया गया है। व्रत एवं पारण के लिए अपने स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को प्राथमिकता दें।


भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें?


प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु के सामने दीपक प्रज्वलित करें और पीले पुष्प तथा तुलसी दल अर्पित करें। धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजा करें।


भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है:


ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥


संतान-सुख और परिवार की मंगल-कामना से भगवान श्रीहरि के समक्ष श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। अपनी सामर्थ्य और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें तथा अगले दिन विधिपूर्वक पारण करें।


एकादशी के दिन किन बातों का ध्यान रखें?


- अनावश्यक क्रोध और विवाद से बचें।

- झूठ, छल-कपट और निंदा से दूर रहें।

- सात्त्विक आचरण और भगवान विष्णु का स्मरण करें।

- अपनी क्षमता से अधिक कठिन उपवास न करें।

- स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या उपवास करें।

- जरूरतमंद व्यक्ति की यथाशक्ति सहायता करें।

- तुलसी एवं भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।


विशेष प्रार्थना


हे श्रीहरि विष्णु! हमारे जीवन और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें। हमें धर्म, सद्बुद्धि, सुख, शांति और संतान-सुख प्रदान करें। हमारे लिए जो उचित और कल्याणकारी हो, वही प्रदान करें। 🙏


श्री मंशापूर्ण ज्योतिष शिवपुरी

डॉ. विकासदीप शर्मा

📞 9993462153


हरि ॐ तत्सत।

जय श्रीहरि विष्णु | हर हर महादेव

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)
3/related/default