करैरा के छितिपुर हाईस्कूल में आयरन की गोली सेवन के बाद चार बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना ने विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों को दवा देना महज औपचारिकता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। सवाल यह है कि गोली देने से पहले दवा की गुणवत्ता, बैच नंबर और एक्सपायरी की जांच हुई थी या नहीं? बच्चों को दवा किसकी निगरानी में खिलाई गई और सेवन के बाद उनकी स्थिति पर नजर रखी गई या नहीं? चार बच्चों के बीमार होने के बाद यदि विभाग के पास स्पष्ट जवाब नहीं है तो यह महज संयोग नहीं, व्यवस्था की गंभीर चूक मानी जाएगी।